कामसूत्र क्या है ? कामसूत्र से जुड़े मिथक

Knowledge
Spread the love

कामसूत्र प्राचीन भारतीय ग्रंथों में से एक है। कई शताब्दियों पूर्व, भारतीय परिवेश व लोगों के आपसी संबंधों के बारे में इसमें विस्तार पूर्वक बताया गया है। कामसूत्र प्यार के सच्चे स्वरूप को बताने वाला वैज्ञानिक ग्रंथ है, जिसका लक्ष्य समाज में महिला व पुरुष के रिश्ते के सभी पहलुओं व कर्तव्यों को उजागर करना है। ‘कामशास्त्र’ शब्द का अर्थ समझाया जाए, तो इसका सीधा अर्थ ‘काम के सिद्धान्त को बताने वाला ग्रंथ’ निकलता है। इसमें मौजूद ‘काम’ शब्द का मतलब शारीरिक और भावनात्मक संतुष्टि बताया गया है।

google images

महर्षि वात्स्यायन ने संस्कृत भाषा में कामसूत्र को लिखा था। कामसूत्र दुनियाभर में ‘काम क्रिया’ पर लिखा गया पहला ग्रंथ माना जाता है। महर्षि वात्स्यायन के बारे में इतिहास में कोई पुख्ता जानकारी मौजूद नहीं है परंतु वात्स्यायन के बारे में विद्वानों ने दक्षिण-पश्चिम भारत में स्थित खजुराहों की मूर्तिकला को देखते हुए अंदाजा लगाया है कि वह इसी स्थान पर रहते होंगे। गुप्तकाल के समय साहित्य और वास्तुकला का विकास हुआ था, इसीलिए महर्षि वात्स्यायन के द्वारा रचित कामसूत्र को इसी समय का माना जाता है।

महर्षि वात्स्यायन द्वारा कामसूत्र को लिखने का उद्देश्य मात्र यौन संबंधों को उजागर करना नहीं था। उन्होंने काम आनंद के गंभीर विषय पर सैद्धांतिक व वैज्ञानिक दृष्टिकोण से विचार करते हुए इस ग्रंथ की रचना की थी। इस ग्रंथ में इस तरह के आनंद को पाने के सभी पहलुओं व कर्तव्यों के बारे में बताया गया है।

कामसूत्र से जुड़े मिथक

आज कामसूत्र को लेकर लोगों मे कई तरह के मिथक प्रचलित है, जबकि सही मायने में कामसूत्र लोगों के जीवन को सरल बनाने के लिए लिखा गया था। परंतु, इसके अनुवाद के बाद इस ग्रंथ को केवल सेक्स व सेक्स पोजीशंस को ही बताने वाली पुस्तक के रूप में दिखाया गया, जिसके कारण दुनियाभर में कामसूत्र को लेकर कई तरह के मिथक बन गए। नीचे उन्हीं मिथकों के बारे में बताया जा रहा है।

कामसूत्र (Kamasutra) यौन आसनों के बारे में बताता है –

आज अधिकतर लोगों का यह मानना है कि कामसूत्र केवल सेक्स पोजीशन्स के बारे में बताता है, जबकि असल में ऐसा नहीं है। कामसूत्र का मात्र 20 प्रतिशत हिस्सा ही इस पक्ष को उजागर करता है। इसके अलावा इस ग्रंथ में महिला व पुरुषों के संबंधों व कर्तव्यों पर अधिक गहराई से चर्चा की गई है। कामसूत्र के मात्र एक भाग में 64 आसनों के बारे में बताया गया है, लेकिन इन यौन आसनों के अलावा इसमें काम भावना की उत्पत्ति, कामेच्छा को जागृत करने, काम क्रिया किस तरह से अच्छी या बुरी होती है संबंधी बातों के बारे में भी बेहद सरल तरीके से बताया गया है।

 सेक्स ग्रंथ मानना –

आपको बता दें कि महर्षि वात्स्यायन ने इसमें ‘काम’ के बारे में लिखा है। आज लोग ‘काम’ को मात्र यौन आनंद व सेक्स समझ लेते है, जबकि इसमें ‘काम’ के अंतर्गत भावनाओं और इंद्रियों के द्वारा महसूस होने वाले आनंद को शामिल किया गया है। जैसे- किसी नरम कपड़े का त्वचा पर छूना, संगीत की मुधर तान, सुगंध व किसी चीज खाने पर मिलने वाला आनंद आदि को ‘काम’ का ही एक रूप कहा जा सकता है। कामसूत्र के मात्र एक भाग में यौन संबंधों को बनाने से संबंधित बातें लिखी गई हैं।

प्रचलन में न होना –

कई लोगों में मिथक है कि कामसूत्र वर्तमान समय के अनुसार प्रचलन से बाहर हो चुका है, लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं है। कई सौ वर्ष पूर्व लिखे जाने के बाद भी यह वर्तमान समय में उपयोगी है। बेशक आज मानव जीवन के कई क्षेत्रों में उन्नति की जा चुकी हो, परंतु किसी के प्रति भावनाओं का जागृत होना या महिला व पुरुष के संबंधों की आधारशीला आज भी पहले की ही तरह है।

तांत्रिक ग्रंथ समझना –

हमारे समाज में कई लोग ऐसे भी हैं जो कामसूत्र को यौन क्रिया के साथ ही साथ तांत्रिक ग्रंथ भी समझते हैं, जबकि सच्चाई इससे बिल्कुल अलग है। कामसूत्र में मात्र समाज में महिला व पुरुष के संबंधों और काम को विस्तार से वर्णित किया गया है। यह कोई तांत्रिक ग्रंथ नहीं है।

Leave a Reply