बायसेक्सुअल क्या होता है, कारण, लक्षण, क्या करें

Knowledge
Spread the love

व्यक्ति को “बाइसेक्सुअल” (bisexual) तब कहा जाता है जब वह पुरुष और महिलाओं, दोनों ही की तरफ मानसिक या शारीरिक रूप से आकर्षित होता है। बाइसेक्सुअल होना व्यक्ति के मन की इच्छाओं और व्यवहार की एक सामान्य स्थिति है। यह कोई रोग या संक्रामक बीमारी नहीं है।

google images

यह बात अभी तक अज्ञात है कि कोई बाइसेक्सुअल क्यों होता है। लेकिन रिसर्च से ऐसे अंदेशे मिलें हैं कि किसी भी व्यक्ति का विपरीत, समान या दोनों ही लिंग के लोग के साथ मानसिक व शारीरिक आकर्षण जन्म के पूर्व से ही जैविक कारकों पर निर्भर करता है।

इस लेख में विस्तार से बताया जा रहा है कि बाइसेक्सुअल होना क्या है, बाइसेक्सुअल होने के कारण व लक्षण क्या होते हैं और यदि आप या आपका कोई परिचित बाइसेक्सुअल हो तो आपको क्या करना चाहिए आदि।

बाइसेक्सुअल क्या है

एक से अधिक लिंग के लोगों के साथ शारीरिक, यौन और भावनात्मक आर्कषण महसूस करने वाले व्यक्ति को “बाइसेक्सुअल” कहते हैं।

समान और विपरीत लिंग के लोगों की सुंदरता को केवल सराहना बाइसेक्सुअल होना नहीं है। लेकिन अगर बात सराहने से आगे बढ़ कर महिला और पुरुष दोनों के साथ यौन सम्बन्ध बनाने तक पहुँच जाए, तो उसे बाइसेक्सुअल होना कहा जाता है।

जीव और सेक्स वैज्ञानिक अल्फ्रेड किन्ज़ी लैंगिकता के पैमाने के बारे में बताते हुए कहते हैं कि इसको काले और सफेद (विपरीत लिंग से आकर्षण और समान लिंग से आकर्षण) के आधार पर व्यक्त नहीं किया जा सकता है। यह इन दोनों ही अवस्था के बीच की स्थिति होती है। उन्होंने इसके लिए एक पैमाना बनाया जिसे “किन्ज़ी स्केल” कहा जाता है। यह पैमाना 0 से 6 तक होता है। 0 को विपरीत लिंग के प्रति आकर्षण और 6 को समान लिंग के प्रति आकर्षण कहा जाता है। तो इस पैमाने के हिसाब से बाइसेक्सुअल को किन्ज़ी स्केल पर 3 माना जाता है।

बाइसेक्सुअल होने के कारण

कोई व्यक्ति बाइसेक्सुअल क्यों होता है?

किसी व्यक्ति के समलैंगिक (गे या लेस्बियन) और बाइसेक्सुअल होने के कारणों के बारे में कुछ भी सही तरह से मालूम नहीं चल सका है, लेकिन कुछ रिसर्च से पता चलता है कि जन्म से पहले के कुछ जैविक कारकों द्वारा “सेक्सुअल ओरिएंटेशन” (आप जिस लिंग के व्यक्ति के साथ संबंध बनाने के लिए आकर्षित होते हैं) की संभावना आंशिक रूप निर्धारित होती है।

सेक्सुअल ओरिएंटेशन कोई विकल्प नहीं है और ना ही इसको बदला जा सकता है। किसी भी थेरेपी, उपचार या अन्य उपाय से व्यक्ति की सेक्सुअल ओरिएंटेशन को नहीं बदला जा सकता है। इसके अलावा आप किसी भी व्यक्ति को बाइसेक्सुअल में परिवर्तित नहीं कर सकते हैं।

आप युवावस्था में ही इस बात के बारे में जान सकते हैं कि आप किसके प्रति (महिला या पुरुष) आकर्षित होते हैं। यहां पर आकर्षित होने का मतलब यह नहीं है कि आप में यौन इच्छाएं हैं, बल्कि मतलब है कि आप यह पहचान पाते हैं कि किस लिंग के लोग आपको आकर्षित करते हैं। कई लोग बताते हैं कि उन्होंने किशोरावस्था से पहले ही पता चल गया था कि वह गे, लेस्बियन या बाइसेक्सुअल हैं।

सेक्सुअल ओरिएंटेशन आमतौर पर जीवन में शुरूआती दौर में ही निर्धारित हो जाती है, लेकिन जीवन के किसी भी पड़ाव में आपकी इच्छाओं में बदलाव होना कोई असामान्य बात नहीं है। इसे “फ्लयूडिटी” कहा जाता है।

Leave a Reply