वीर्य पतला होने के कारण

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आज के दौर में यह एक आम समस्या बन कर लोगों को परेशान कर रही है। इस समस्या का कारण निम्न है।

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शुक्राणुओं की संख्या में कमी – शुक्राणुओं की संख्या में कमी वीर्य के पतला होने का सामान्य कारण होता है। इसको अल्पशुक्राणुता भी कहा जाता है। वीर्य में शुक्राणुओं की एक सामान्य संख्या पाई जाती है। बताया जाता है कि एक मिली लीटर वीर्य में करीब 15 करोड़ शुक्राणु होते हैं। इससे कम होने पर वीर्य में शुक्राणुओं की कमी माना जाता है। अल्पशुक्राणुता होने के निम्न कारण होते हैं।

– वैरीकोसेले – इस रोग में अंडकोष व अंडकोषीय थैली की नसों में सूजन आ जाती है। इससे पुरुष की प्रजनन क्षमता प्रभावित होती है। इस समस्या को इलाज से ठीक किया जा सकता है।

– संक्रमण – उदाहरण के लिए यौन संचारित रोग (एसटीडी) जैसे गोनोरिया या कोई अन्य संक्रमण भी प्रजनन अंगों में सूजन होने का कारण हो जाते हैं। इससे भी अंडकोष में सूजन आ जाती है।

– ट्यूमर – अंडकोष में मैलिग्नेंट व बिनाइन ट्यूमर होने से शुक्राणुओं के बनने की क्षमता प्रभावित होती है।

– हार्मोन असंतुलित होना – अंडकोष व पिट्यूटरी ग्रंथि के द्वारा बनने वाले हार्मोन का असंतुलन होना। इससे शुक्राणुओं की संख्या में कमी आ जाती है।

– इसके अलावा प्रतिरक्षा तंत्र के द्वारा शुक्राणुओं की कमी वाले एंटीबॉडी बनाना।

– शुक्राणुओं को वीर्य तक लाने वाली नलियों में चोट आना या कोई अन्य समस्या होना।

​​नियमित स्खलन करना-

नियमित रूप से स्खलन से भी आपका वीर्य का पतला हो जाता है। अगर आप एक दिन में कई बार हस्तमैथुन करते हैं तो वीर्य की गुणवत्ता पहली बार स्खलन के बाद पतली होने लगती है। आपके शरीर को दोबारा से वीर्य बनाने के लिए कुछ घंटों का समय चाहिए होता है। एक निश्चित समय अंतराल के बाद दोबारा स्वस्थ वीर्य बनता है।

जस्ता ( जिंक) की कमी-

वीर्य के पतला होने के कारण में जिंक की कमी को भी शामिल किया जाता है। एक रिसर्च में इस बात का पता चला है कि पुरुषों में जिंक की एक निश्चित मात्रा होती है। अगर पुरुषों में जिंक निश्चित मात्रा से कम होता है तो शुक्राणुओं की संख्या में कमी आ जाती है। शुक्राणुओं की कमी के लिए जिम्मेदार एंटीबॉडी को कम करने के लिए जिंक सलफेट का सेवन करना चाहिए।

शीघ्रपतन-

अगर आपका वीर्य पतला हो गया है तो इसके पीछे शीघ्रपतन भी एक कारण हो सकता है। कई बार फोरप्ले के दौरान भी वीर्य निकल जाता है। इस वीर्य में भी शुक्राणु मौजूद होते हैं। इसके कारण भी वीर्य की गुणवत्ता पर प्रभाव पड़ता है।

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