मुल्क : जानिये वह 5 कारण जिनकी वजह से हर हिन्दू- मुसलमान को यह फिल्म जरुर देखनी चाहिए

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कल ऋषि कपूर की फिल्म “मुल्क” का ट्रेलर रिलीज़ किया गया | आप लोगों को बता दे की इस फिल्म को लेकर दर्शकों में कोई चर्चा या गहमागहमी नहीं थी की ऐसी भी कोई फिल्म आने वाली है | इसका कारण साफ़ था की इस फिल्म में कोई बड़ा स्टार नहीं है | ऋषि कपूर जैसा अधेढ़ उम्र का अभिनेता इस फिल्म में होगा और उनके साथ होंगी दो चार फिल्मों पुरानी तापसी पन्नू |

लेकिन इसका ट्रेलर देखने के बाद ऐसा लगा की अब इस फिल्म पर चर्चा होना लाजिमी है |और न केवल चर्चा बल्कि यह फिल्म ऐसे विषय पर आधारित है जो देश में एक बाद मुद्दा है | और हमारे अनुसार तो इस फिल्म में हिन्दू और मुसलमान सबको रुचि दिखानी चाहिए |

फिल्म का विषय

आजकल सोशल मीडिया के ज़माने में सुबह से लाकर शाम तक हिन्दू-मुस्लिम आपस में लड़ते रहते हैं | दोनों ही पक्ष एक दुसरे पर आरोप प्रत्यारोप लगाते रहते हैं | लेकिन जहाँ अभी तक लोगों ने केवल पण पक्ष ही रखा होगा | इस फिल्म के माध्यम से वे दुसरे पक्ष को भी सुन और समझ पायेंगे |

फिल्म में भी एक भारतीय मुसलमान की कहानी दिखाई गयी है | जिसके बेटे के आतंकवादी होने पर उसपर भी इसी तरह के इल्जान लगाए जाते हैं | इस किरदार में दोनों धर्मों के लोगों की दिलचस्पी लेने की अलग अलग वजह हैं | जिन मुद्दों पर हिन्दू और मुस्लिमों में झगडे होते हैं | उन सभी मुद्दों का इस फिल्म में समावेष लगता है | इस किरदार के माध्यम से आरोप लगाने के पीछे के कारण जहाँ हिन्दू पक्ष की बात रखेंगे | वहीँ वह किरदार अपने बचाव में क्या कहता है यह मुस्लिम पक्ष की विचारधारा को दर्शायेगा | इसलिए हिन्दू और मुसलमान दोनों की इस फिल्म में रुचि लेना लाजिमी है |

निष्पक्ष रवैया

इस फिल्म के ट्रेलर को आप देखें तो आपको कहीं से भी यह नहीं लगता की यह फिल्म किसी सम्प्रदाय या धर्म विशेष के विरोध में हैं | या फिर उनके समर्थन में हैं | इस फिल्म के ट्रेलर में जहाँ ऋषि कपूर इस बात से दुखी जरुर होते हैं की उनका आकलन उनके धर्म के आधार पर किया जा रहा है |

 

वहीं एक दुसरे सीन में वे यह कहते हुए दिखाई पड़ते हैं की पाकिस्तान की जीत पर पटाखे बजाओगे तो लोग पाकिस्तानी तो कहेंगे यानी वे जहाँ सही है वहां अपना पक्ष भी रख रहे हैं | लेकिन जहाँ गलत हैं उस मामले में खुद की गलती भी मान रहे हैं | यानी यह फिल्म न तो किसी भी सम्प्रदाय विशेष की विचारधारा के प्रति सहानुभूति दिखाती है | और न ही किसी सम्प्रदाय विशेष का विरोध करती है |

साफगोई

इस फिल्म का विषय बेशक काफी संवेदनशील है लेकिन निर्देशक ने लोगों की कोई सोच दिखाने में कोई नरमी नहीं बरती हैं | इस ट्रेलर में जहाँ आशुतोष राणा मुस्लिमों की बढती आबादी पर तंज कसते हुए नज़र आते हैं |

व यह भी कहते हुए नज़र आते हैं की अच्छे और बुरे मुसलमान में फर्क कैसे करें | और जाहिर सी बात है की इन सवालों के जवाब भी इस फिल्म में सोच समझकर दिए गये होंगे | यानी इस फिल्म न केवल मुद्दा उठाया ही नहीं है | बल्कि निर्देशक मुद्दे की तह तक जाने तक भी तैयार है | और

मुस्लिम पक्ष

इस फिल्म में मुस्लिम पक्ष की बात रखने पर भी जोर दिया गया है | इस फिल्म के अंत में ऋषि कपूर कहते हैं की बेशक से आप मेरी दाढ़ी और ओसामा की दाढ़ी में फर्क नहीं कर पा रहे हैं फिर भी मुझे हक है अपनी सुन्नत निभाने का | यानी इस फिल्म में अगर मुसलमानों पर कुछ आरोप लगे हैं | तो भी उन्हें भी अपनी बात कहने का पूरा मौका दिया गया है | जो आरोप लगाए वे अगर हिन्दुओं का प्रतिनिधित्व करते हैं | तो जो जवाब दिए गए हैं वह मुसलामानों का प्रतिनिधित्व करेंगे |

अमन और शान्ति का पैगाम

इस फिल्म के एक सीन में ऋषि कपूर कहते हैं की प्यार साबित कैसे किया जाता है प्यार करके ही न | यानी यह फिल्म हिन्दू और मुसलामानों की आपसी समस्याओं पर तो है | लेकिन यह फिल्म इन संबंधों को बेहतर करने की और गौर करेगी न की उन्हें खराब करने की और | इसलिए इस फिल्म को हर हिन्दू और मुसलमान को जरुर देखना चाहिए | इस ट्रेलर को देखने के बाद आपके मन में भी इस फिल्म को देखने की जिज्ञासा जरुर जागेगी |

कुल मिलाकर हर हिन्दू व मुसलमान को यह फिल्म इसलिए देखनी चाहिए ताकि दोनों एक दुसरे के प्रति चल रही भ्रांतियों को समझ पाए | व एक दुसरे को अच्छे से समझ लेने के बाद ही इस समस्या का कोई हल निकल पायेगा |

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