ये भारतीय फीफा विश्वकप में बिना भारतीय टीम के मैदान पर आया नजर

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जानें कौन है ये भारतीय लड़का जो फीफा विश्वकप में यूं बन गया इतिहास का हिस्सा

रूस में जारी फीफा विश्वकप में सोमवार का दिन भारत के लिए ऐतिहासिक बन गया। सोची के फिश्ट स्टेडियम में खेले गये पनामा और बेल्जियम के बीच मुकाबले से पहले भारत के ऋषि तेज इतिहास के उस पल के गवाह बने। दोनों टीमों को गेंद सौंपने वाले 10 वर्षीय ऋषि विश्वकप में बॉल बॉय बनने वाले पहले भारतीय बने।

इस एकतरफा मुकाबले में बेल्जियम ने पनामा को 3-0 से माद देते हुए एकतरफा जीत दर्ज की। इस मैच के लिए आधिकारिक रूप से ऋषि और 11 वर्षीय नाथानिया जॉन कानडाथिल आधिकारिक मैच बॉल कैरियर्स चुने गये थे। ऋषि को जब ये पता चला तो वह रूस पहुंचने से पहले तकरीबन एक हफ्ते नहीं सो पाए थे, जबकि नाथानिया इसके लिए रोमांचित थीं लेकिन उनकी नींद नहीं उड़ी थी।

इंडिया टुडे से बात करते हुए ऋषि ने कहा, “मैं इसके लिए बेहद रोमांचित था, जिसको मैं शब्दों में बयां नहीं कर पाऊंगा। रूस में पहुंचने के बाद मैं हर एक लम्हे को जीना चाहता हूं, वहीं अगर मैच की बात करें तो मैं उसका आंनद नहीं उठाता हूं बल्कि वह खेलते कैसे हैं इस बारे में सोचता हूं।”

बंगलुरू के ऋषि के अलावा तमिलनाडु की नाथानिया एकमात्र लड़की थीं, जिन्हें फीफा ने अपने आधिकारिक कैंपेन के जरिये 50 लड़कों में से चुना था। इन दोनों ने अपनी स्किल से बाकी बच्चों को बीट करके ये स्थान हासिल किया था।

नाथानिया 22 जून को होने वाले ब्राजील और कोस्टा रिका के बीच होने वाले मुकाबले के दौरान मैदान में दोनों टीमों को मुकाबले से पहले बॉल सौंपेंगी। फीफा के ओएमबीसी कार्यक्रम के तहत दुनिया के 64 स्कूली बच्चों को चुना गया था। जिसमें दो बच्चे भारत के हैं, खास बात ये भी है कि फीफा विश्वकप के इतिहास में पहली बार भारत के दो बच्चे बॉल बॉय बने हैं। जहां उन्हें दुनिया के धुरंधर फुटबॉलरों के साथ कदमताल करने का मौका मिला।

किया मोटर्स और फीफा ने ऋषि और नाथानिया को चुनने के बाद उनकी लाइफ स्टोरी और फुटबॉल प्रेम को हर व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए एक वीडियो सांग भी बनाया था।

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