बाबा राम रहीम की छाया से डरने लगे हैं डेरा भक्त | जानिये कैसे ?

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लोग जिस बाबा का गुनगान दिन रात किया करते थे, आज उनके साए से डरने लगे हैं.

वे अब बाबा राम रहीम की तस्वीर को घरों और दुकानों से हटाने लगे हैं. पहले जो ख़ुद को शान से डेरा प्रमुख कहा करते थे, आज वे अपनी पहचान छिपाते घूम रहे हैं.

बाबा की श्रद्धालु रहीं कुताबाद की सिमरन देवी ने कहा कि वह डेरा के अच्छे काम को देखकर सेवा कर रही थी, लेकिन असलियत का पता अब चला है.

वहीं बाजेकां के रहने वाले ज्ञान कौर कहते हैं जो इंसान ग़लत करता है उसे सजा मिलती है. राम रहीम से पहले वाले संत अच्छे थे.

इसी गांव के एक अन्य श्रद्धालु ने कहा, “जब बाबा फ़िल्म बनाने लगे तब से मेरा मन उन से उखड़ने लगा था. बाबा ने फ़िल्मों में जिस तरह के कपड़े पहने थे, वो भी मुझे पसंद नहीं आया.”

कासनखेड़ा के एक वृद्ध श्रद्धालु ने कहा कि बाबा डेरा के नाम पर लोगों का आर्थिक, शारीरिक और मानसिक शोषण कर रहे थे. उन्होंने लोगों को लूटा है.

सिरसा के राजू मोंगा ने कहा अब एक अच्छे व्यक्ति को डेरा का सिंहासन संभालना चाहिए.

फिलहाल क्या है स्थिति

गुरमीत राम रहीम ने सिरसा में दो डेरा बसाए थे. दोनों के बीच छह किलोमीटर का फ़ासला है. पुराना डेरा सरकार के कब्जे में है. डेरे के इर्द-गिर्द सेना तैनात है. वहीं, नए डेरे से एक किलोमीटर की दूरी पर सेना के जवान तैनात हैं.

फिलहाल सेना ने दोनों डेरे में किसी तरह का तलाश अभियान नहीं चलाया है. नया डेरा लगभग खाली हो चुका है. अनुमान ये है कि 250 लोग यहां रह रहे हैं. ये वे लोग हैं जिनका रहना-सहना डेरा के अंदर ही होता है.

डेरे के अंदर सात फैक्ट्री चलती थी, जो अब बंद हो चुके हैं. इन फैक्ट्रियों से राम रहीम ‘एमएसजी’ के नाम से उत्पाद बनाते थे. ये खाद्य पदार्थ, कपड़े आदि हुआ करते थे.

ये चर्चा हो रही है कि अराजक़ किस्म के लोग नए डेरे से खेत के रास्ते भाग चुके हैं. सिरसा के एसडीएम परमजीत सिंह चहल ने बीबीसी को बताया, “हमारा मकसद इलाक़े में शांति बनाये रखने का था. डेरा के अंदर जाने की इजाजत हमलोगों को नहीं मिली है.”

अंशुल के आरोप

सेना के मेजर जनरल राजपूत सिंह पुनिया ने भी तलाशी अभियान के प्रश्न पर पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि उन्हें इस दिशा में राज्य सरकार से किसी तरह की कार्रवाई करने के निर्देश नहीं मिले हैं.

वहीं, गुरमीत राम रहीम सिंह के सच को पहली बार लोगों के सामने लाने वाले ‘पूरा सच’ अखबार के दिवंगत संपादक रामचंद्र छत्रपति के बेटे अंशुल छत्रपति ने सरकार को शरारती तत्वो को संरक्षण देने का आरोप लगाया है.

अंशुल ने कहा है, “शिविर की घेराबंदी की जा चुकी है लेकिन सेना को उसके अंदर घुसने के निर्देश नहीं दिए गए हैं. आख़िर सरकार तलाशी अभियान क्यों नहीं चला रही है, लोग यह जानना चाहते हैं.”

बाबा को दोषी ठहराए जाने के बाद अंशुल की सुरक्षा बढ़ा दी गई थी. स्थानीय डीएसपी दिलीप सिंह ने उनकी सुरक्षा की समीक्षा की है.

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